नोट बदलने की Line में लगने वाले खुद पर गर्व क्यों करें – ये अच्छे से समझ लें। मोदी का खेल दूर की कोड़ी है।

why should you feel proud if you are in line to change notes
1. नेता इसलिए हल्ला मचा रहे हैं क्योंकि इन्होंने ही तो सबसे ज्यादा ब्लैक मनी कमाया था। खुद सोचिए कि एक इलैक्शन जीतने के लिए ये 5-10 करोड़ रूपए पानी की तरह बहा देते हैं ये कहकर कि वो जनता की सेवा करना चाहते हैं। अगर पूरे 5 साल सरकार से मिलने वाली नंबर 1 की कमाई को जोड़ा जाए तो भी इनको चुनाव में खर्च किया पैसा वापस नहीं मिल सकता, तो फिर क्योंकि ये राजनीति में आते हैं। समाजसेवा तो बहाना है खुद की सेवा (काली कमाई) ही असली उद्देश्य है। अगर समाजसेवा ही करनी है तो गरीबों में सीधे क्यों बांट नहीं देते 5-10 करोड़। 70 साल में जिन बड़े बडे़ राजनैतिक परिवारों ने काली कमाई से कुबेर का खजाना बनाया था, अब वो मोदी के 1 घंटे के भाषण में ही बेकार हो गया। ऐसे में फड़फड़ाना लाजिमी ही है।
 
2. बैंक और एटीएम की लाइन में वही लगा है जो ईमानदार है और जिनके पास नंबर 1 ही पैसा है। इसलिए खुद पर गर्व करें।




 
3. नंबर 2 का पैसा रखने वाले बैंक में पैसा नहीं रखते, बल्कि घर के गद्दे, सोफे, बैड, दीवार, छट, पानी की टंकी, एसी, फैन इत्यादि में छिपाकर रखते हैं। ये लोग इतने होशियार है कि ये लाइन में लगने नहीं आए हैं। क्योंकि इनको पता है कि 50 दिन का वक्त है पैसा बदलने के लिए। इसलिए पहले ये चैन से बैठकर टीवी पर देख रहे हैं कि क्या माहौल है। इस बीच ये जुगाड़ में लगे हैं कि कहां से पैसा बचाया जा सकता है।
 
4. मोदी ने धीरे धीरे 2.5 साल में ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि काले पैसे को सफेद करने वाली सभी तरह की Fair and Lovely क्रीम पहले ही खत्म कर दी है यानी चक्रव्यूह से बाहर निकलने के सभी रास्ते बंद हैं। इसलिए काला पैसा सर्दी में सिर्फ आग लगाकर गर्मी का अहसास करने के ही काम आएगा।
 




5. अभी कि तकलीफ वैसी है जैसे नई जॉब का पहला 1 महीना, नए बच्चे का घर में आना, नए घर में जाना, नई दुल्हन का सुसराल में जाकर एडजस्ट होना। जब आप इतने सारे दर्द पहले ही झेल चुके हैं तो फिर ये दर्द क्या बड़ी चीज है।
 
6. आखिरी – देश का 86 प्रतिशत पैसा 500 और 100 के नोटों के रूप में है जिसमें सबसे ज्यादा लोगों ने ब्लैक मनी के रूप में घर में छुपाकर रखा हुआ है। अगर इसको ही खत्म कर दिया जाए तो आपकी पड़ोस में रहने वाला जो व्यक्ति 50 हजार रूपए कमाने के बावजूद 30 लाख की कार में घूमता है वो भी 1 साल बाद वैगन आर में ही घूमेगा। यानी गरीबी-अमीरी के बीच खाई कम होगी और भ्रष्ट्राचार को इस लेवर पर आने में फिर से 70 साल लगेंगे।

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