कांग्रेसियों के एक गलत फैसले से 100 साल पहले भारत घोषित हुआ था दिवालिया ! 47,746 सैनिकों ने गंवाई थी जान ! कांग्रेस की ऐसी भूल जिस पर कोई नहीं करता चर्चा

ये कोई राजनैतिक नजरिए वाला आर्टिकल नहीं बल्कि इतिहास की फाइलों से निकली सच्चाई है। 1991 में भारत को दूसरे देशों के पास अपना सोना गिरवी रखना पड़ा था, लेकिन फिर भी भारत दिवालिया नहीं हुआ था। लेकिन क्या आपको मालूम है कि अब से करीब 100 साल पहले 1918 में भारत दिवालिया हो चुका है। और इसके पीछे का कारण उस समय के कांग्रेस नेताओं का एक गलत फैसला था।

क्या हुआ था

1914 में पहला विश्व युद्ध शुरु हुआ। एक तरफ जर्मनी और दूसरी तरफ ब्रिटेन और बाकी मित्र देश। एक तरफ यूरोप में युद्ध में ब्रिटेन एक मोर्चे पर लड़ रहा था तो दूसरी तरफ महात्मा गांधी ने द.अफ्रीका से लौटकर ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ आजादी की लड़ाई का दूसरा मोर्चा खोल दिया था। युद्ध में ब्रिटिश सरकार ने भारत जैसे उन देशों के लाखों सैनिकों को भी युद्ध में झौंकने का फैसला लिया जिन्हें ब्रिटेन ने गुलाम बना रखा था।

कांग्रेस ने क्या फैसला लिया

इस बीच भारत में तेजी से आजादी की लड़ाई से लोग जुड़ने लगे थे। जर्मनी को ये बात अच्छे से पता थी कि अगर भारत में आजादी की लड़ाई में थोड़ा सा तेल डाला जाए तो ब्रिटिश साम्राज्य ना केवल खत्म जाएगा बल्कि वो युद्ध भी हार जाएगा। इसलिए जर्मनी ने कांग्रेसी नेताओं से इस बारे में बातचीत शुरु की और मदद का ऑफर किया।

इस बीच ब्रिटिश सरकार को जर्मनी की इस कोशिश की ख़बर लग गई। तुरंत ही उन्होंने कांग्रेसी नेताओं से मुलाकात की और युद्ध में धन-दौलत और सैनिकों समेत हर तरह से ब्रिटेन का साथ देने के लिए मना लिया।

कांग्रेसियों को लगा कि युद्ध के बाद भारत को ब्रिटेन आजाद कर देगा। कांग्रेसियों के कहने पर देश की रियासतों के राजाओं और सेठ लोगों ने दिल खोलकर ब्रिटेन को धन-दौलत से लेकर सैनिकों की फौज तक दे डाली।

नतीजा क्या रहा

भारत के सैनिकों ने ब्रिटेन के लिए कांग्रेस के कहने पर बेल्जियम, फ्रांस, अरब देशों, पूर्वी अफ्रीका, फिलिस्तीन से लेकर पर्सिया, सालोनिका और गाली पोली तक दर्जनों देशों में युद्ध लड़ा। 8 लाख भारतीय सैनिक भूखे प्यासे ब्रिटेन के लिए युद्ध में दिन रात लड़ते रहे। ताकि भारत युद्ध के बाद आजाद हो जाए। लेकिन हुआ क्या। 47,746 सैनिकों ने जान गंवाई और 65 हजार सैनिक बुरी तरह जख्मी हो गए। ब्रिटेन को अपनी धन-दौलत देने के कारण भारत इतिहास में पहली और आखिरी बार दिवालिया हो गया।

यानी कांग्रेस के नेताओँ के कहने पर देश ने धन-दौलत से लेकर जान तक सबकुछ कुर्बान कर दिया और बदले में ईनाम के तौर पर ब्रिटेन ने आजादी देने के बजाय युद्ध के तुरंत बाद 1919 में जलियावाला बाग कांड कर डाला।

ज्यादा हाय-तौबा मचने पर गढ़वाल राइफ्लस रेजिमेंट के 2 सैनिकों को संयुक्त राज्य का सबसे बड़ा पदक विक्टोरिया क्रॉस देकर चुप कर दिया गया।

क्या भारत कभी हुआ है दिवालिया? सबसे ज्यादा बार कौन हुआ दिवालिया?

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