क्या भारत, पाक समर्थकों के साथ वो नहीं कर सकता जो इंग्लैंड ने 229 साल पहले 1,66,000 लोगों के साथ किया था?

जब जब पाकिस्तान के सैनिक या पाक समर्थक आतंकवादी भारत के किसी भी हिस्से पर हमला करते हैं, तो एक सच्चे भारतीय को कितना गुस्सा आता है ये सिर्फ एक सच्चा भारतीय ही जानता है। लेकिन उसका खून तब ज्यादा खोलता है जब भारतीय कहे जाने वाले कुछ नेता और लोग, पाकिस्तान का खुला समर्थन करते हैं।

ऐसे लोगों की कमी नहीं है। कभी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में कोई उरी इलाके में मारे गए सैनिको को गाली देता है, तो कभी जेएनयू का चहेता लाल, कन्हैय्या अपनी हैसियत से ज्यादा बोलता है। कभी गाय-भैंसों का भी चारा खा जाने वाले नेता लालू प्रसाद यादव की पार्टी के चापलूस नेता सैनिकों के लिए बकवास करते हैं तो कभी राम का नाम लेने की उम्र में भी रोमियो बन चुके कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह राजनीतिक रोटी सेकने के लिए बकवास करते हैं।

australiaये सभी लोग थोड़े थोड़े समय पर साबित करने की कोशिश करते रहते हैं कि ये भारत के बजाय पाकिस्तान के लिए ज्यादा वफादार हैं। इनमें और देश के टुकड़े करने की तमन्ना रखने वाले हुर्रियत कॉंफ्रेंस में कोई फर्क नहीं है।

ऐसे में सवाल उठता है कि पाकिस्तान से वफादारी दिखाने के लिए मरे जा रहे ऐसे लोगों का क्या इलाज है। इतिहास की खाक छानते हुए मुझे इस समस्या का बढ़िया इलाज मिला।

दरअसल, ब्रिटिश सरकार ने करीब सवा 200 साल पहले एक कामयाब एक्सपेरीमेंट किया था। वही एक्सपेरीमेंट भारत को भी करना चाहिए। वो एक्सपेरीमेंट क्या था और ब्रिटेन को क्या फायदा हुआ, इसका पूरा ब्यौरा तथ्यों के साथ नीचे गया गया है।

australia-convits-1समस्या क्या थी

सन 1700 की सदी यानी 18वीं सदी में पूरी दुनिया में ब्रिटिश साम्राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा था। लेकिन इस देश ब्रिटेन में ही कई देशद्रोही और खूंखार अपराधी सर उठा रहे थे। इससे ब्रिटेन परेशान था। ऐसे में ब्रिटिश सरकार इन लोगों को आजीवन सजा के तौर पर अमेरिका भेज दिया करती थी, क्योंकि तब अमेरिका भी गुलाम था। ध्यान रहे कि तब तक अमेरिका बहुत ही पिछड़ा और गरीब देश था। लेकिन जब अमेरिका एक युद्ध के बाद आजाद हुआ, तो 1775 में अमेरिकी सरकार ने अपराधियों को अमेरिकी धरती पर भेजे जाने को बैन कर दिया।

इलाज क्या निकला

ऐसे में ब्रिटेन ने ऑस्ट्रेलिया के रूप में अपराधियों को रखने के लिए नई जमीन ढूंढ ली, जो कि अमेरिका से भी ज्यादा बेहतर होने के साथ साथ अपराधियों को सबक सिखाने के लिए ज्यादा सही थी।

1775 तक ऑस्ट्रेलिया की धरती पर बमुश्किल 250-300 लोग ही रहते थे। ऑस्ट्रेलिया सरकार के सरकारी आकड़ों के मुताबिक 1788 में ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या सिर्फ 589 थी।

australia-convits-1ऐसे में ब्रिटेन ने पानी के बड़े बड़े जहाजों पर हर साल हजारों की तादाद में खूंखार अपराधियों और ब्रिटिश साम्राज्य के लिए खतरनाक लोगों को ऑस्ट्रेलिया में भूखे प्यासे मरने के लिए अकेल छोड़ दिया जाता था। 1820 आते आते हालात हो गए कि हर साल जितने लोग ऑस्ट्रेलिया भेजे जाते थे उनमें से 70 प्रति ब्रिटिश थे।

बड़े स्तर पर ये सिलसिला अगले 80 साल तक यूं ही चलता रहा। इस दौरान कुल 840 पानी के जहाजों में भेड़-बकरियों की तरह कुल 1 लाख 66 हजार अपराधियों और देशद्रोहियों को भरकर ऑस्ट्रेलिया भेजा गया। इनमें करीब 10 प्रतिशत महिलाएं भी थी।

australia-convits-2फिर कैसे बना ऑस्ट्रेलिया

इस फायदा ये हुआ कि ब्रिटेन और अधीन देशों में क्राइम लेवल एकदम नीचे गिर गया। देशद्रोही भी लगभग समाप्त हो गए। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में इन लोगों ने 10 प्रतिशत महिलाओं के साथ अपनी आबादी कई गुना बढ़ा ली। 80 साल पहले जो लोग 500 भी नहीं थे, वो 80 साल में 5 हजार गुना बढ़कर 15 लाख 39 हजार 552 हो गए। जिनमें 6 लाख 90 हजार 280 महिलाएं और 8 लाख 49 हजार 272 पुरूष थे।

– जय हिंद – 

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