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क्यों आजादी के 14 साल बाद गोवा भारत में शामिल हुआ? क्यों और कब पुर्तगाली 451 साल बाद गोवा को छोड़कर भाग गए थे? गोवा को भारत ने कैसे भारतीय गणराज्य में शामिल किया?

Goa – ये शब्द सुनते ही आमतौर पर लोगों को एक बेहद खूबसूरत राज्य की तस्वीर दिखाई देने लगती है। एक ऐसी तस्वीर जिसमें हर तरफ खूबसूरत समुद्री बीच हैं, विदेशी टूरिस्ट घूम रहे हैं और चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है। साथ में चप्पे चप्पे पर पुर्तगाली झलक भी देखने को मिलती है।

मीडिया में क्रिकेट मैचों की रिपोर्टिंग के दौरान मुझे भी ऐसे ही हजारों नजारें देखने को मिली। लेकिन एक बात जो या तो लोगों को पता नहीं है या फिर मुठ्ठी भर लोगों को ही पता है। वो बात ये कि भारत की आजादी के 14 साल बाद गोवा को भारत ने युद्ध में लड़कर जीता था।

पुर्तगालियों का गोवा, दादर नगर हवेली, दमन और दीप पर 451 साल का शासन युद्ध से खत्म किया था। ये बहुत ही रोचक घटना है।

गोवा का इतिहास

भारत के महान सम्राट अशोका के राज्य का कभी हिस्सा हुआ करता था गोवा और उसके आसपास का इलाका। कई राजाओं के राज्य का हिस्सा रहते हुए ये 1312 में दिल्ली की सल्तनत के अधीन आ गया।

1510 आते आते ये कई और हिन्दू-मुस्लिम राजाओं के राज्य का हिस्सा बनता रहा। लेकिन 1510 में पुर्तगालियों की इस पर नजर पड़ी और उन्होंने बिजापुर के सुल्तान यूसुफ आदिल शाह को स्थानीय लोगों के मदद से हराकर पुर्तगाल पर कब्जा कर लिया।

भारत में अंग्रेजों ने तो करीब 200 साल राज किया, लेकिन पुर्तगालियों ने 1510 में गोवा पर जो एक बार कब्जा किया, तो वो फिर 451 साल बाद 1961 में ही खत्म हुआ।

पुर्तगाल से भारत की अपील

1947 में अंग्रेजों से आजादी के बाद भारत ने पुर्तगाल सरकार से अपील की कि वो भारत के कब्जे वाले सभी इलाके भारत को वापस कर दे। लेकिन पुर्तगाल सरकार ने साफ मना कर दिया। कई साल भारत सरकार प्यार से समझाती रही। लेकिन पुर्तगालियों को समझ नहीं आया।

इस बीच पुर्तगाल में स्थानीय लोग 400 साल से ज्यादा समय से चली आ रही गुलामी से उकता चुके थे। अब वो भारत में शामिल होना चाहते थे। इस बीच उनको पाकिस्तान का हाल समझ आ ही चुका था। गोवा के लोगों को पाकिस्तान से ज्यादा भारत के साथ भविष्य उज्जवल और सुरक्षित दिख रहा था।

1961 में युद्ध कैसे शुरु हुआ

1950 में भारत ने पुर्तगाल सरकार पर दवाब डाला कि वो गोवा और उसके आसपास के इलाको को आजाद कर दें और भारत में मिला दे, क्योंकि इन पर भारत इतिहास में पहले कभी हक था। कई देशों ने भारत की इस मांग का खुलकर समर्थन भी किया। लेकिन पुर्तगाल ने हेकड़ी दिखाते हुए मना कर दिया।

ऐसे में 1953 में भारत सरकार ने पुर्तगाल से अपने राजनयिक को वापस बुला लिया। फिर अगले ही साल यानी 1954 में भारत सरकार ने गोवा से भारत आने वाले सभी लोगों पर रोक लगा दी। इस फैसले का नतीजा ये हुआ कि अब कोई भी भारत होते हुए गोवा से दमन, दीवप, दादर और नगर हवेली नहीं जा सकता था। यानी गोवा से उसके आसपास का ट्रांसपोर्ट पूरी तरह से बंद हो गया।

दवाब बढ़ाते हुए भारतीय यूनियन ने इस इलाके में पुर्तगालियों के पानी के जहाजों का भी बॉयकॉट कर दिया।

22 July and 2 August 1954 के बीच दादर-नगर हवेली के स्थानीय लोगों हथियार बंद लोगों ने हमला कर पुर्तगाली सेना को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया।

बात बढ़ती गई। इस घटना के करीब एक साल बाद करीब 3 से 5 हजार निहत्थे भारतीयों के ऊपर पुर्तगाली पुलिस ने गोवा के 6 अलग अलग जगहों पर जमकर मारा पीटा। इसमें करीब 30 लोगों की मौत हो गई। ऐसे में 1 सितम्बर 1955 को भारत सरकार ने गोवा में अपना दफ्तर विरोध स्वरूप अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया।

लेकिन जिस घटना ने पुर्तगाल बनाम भारत युद्ध छेड़ा वो घटी 24 नवम्बर 1961 को, जबकि एक बोट में बैठे कुछ भारतीयों पर पुर्तगालियों ने हमला कर दिया और एक चीफ इंजीनियर मारा गया। इस घटना के बाद पूरे भारत में पुर्तगालियों के खिलाफ जंग लेकर जबरदस्त माहौल बन गया।

लेकिन 19 दिसम्बर 1961 को भारतीय आर्मी ने गोवा के स्थानीय लोगों की भारी मांग पर ऑपरेशन विजय नाम से दो दिन तक पुर्तगालियों के खिलाफ जंग लड़ी। करीब 36 घंटे की लड़ाई के बाद पुर्तगाल भाग खड़े हुए।

कोर्ट कचहरी

पुर्तगालियों ने अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में अपील भी की। लेकिन 1974 में कोर्ट ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाया। फिर 1987 में भारत सरकार ने गोवा का भारत का 25वां राज्य घोषित किया। आज गोवा भारत के सबसे अमीर राज्यों में से एक है।

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