सूचना का सिर्फ एक बोर्ड खत्म कर सकता है रियल एस्टेट में लोगों के साथ होने वाले फ्रॉड को

बिल्डरों की धोखाखड़ी और फर्जीवाड़ा खत्म करने के आसान 10 सुझाव

पिछले दिनों आजतक पर अंजना कश्यप और एबीपी पर किशोर अजवानी ने शानदार ढंग से उन बिल्डरों की गर्दन पकड़ने की कोशिश की जो इस इंडस्ट्री में काफी बड़े नाम बन चुके हैं, लेकिन फ्लैट की टाइम से डिलीवरी देने के मामले में वो किसी भी छोटे बिल्डर से भी गए गुजरे हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि करें तो करें क्या। ऐसा क्या किया जाए कि देश में ब्लैक मनी को वाइट करने का सबसे बड़ा जरिया बन चुके रियल एस्टेट के छोटे बड़े सभी बिल्डर, इमारेतें बनाने का काम नंबर एक में ही करें और लोगों को कोई दिक्कत ना हो। ऐसे 10 सुझाव हैं जो इस परेशानी को हमेशा हमेशा के लिए ना केवल खत्म कर सकते है बल्कि सरकार की मोटी कमाई का नया जरिया बन सकते हैं।

आर्टिकल की शुरुआत एक सवाल से करना चाहूंगा। सवाल ये कि अगर अप किसी बिल्डर को नकली नोट देंगे तो क्या वो आपको फ्लैट देगा? नहीं ना। वो तो कहेगा असली नोट दो तभी फ्लैट मिलेगा। ऐसे में सवाल उठता है कि जब नोट असली चाहिए तो उपभोक्ता को प्रॉपर्टी क्लिन क्यों नहीं मिली चाहिए। देश की अदालतों में लाखों केस प्रॉपर्टी के लिए लड़े जा रहे हैं, इनमें घरेलू संपति के मुकदमें शामिल नहीं है। करोड़ों लोगों को हजारों बिल्डर चूना लगाकर गायब हो जाते हैं।

इस मुद्दे पर मेरे कुछ ऐसे सुझाव हैं जो वाकई में काफी कारगर साबित हो सकते हैं। इसके पीछे का कारण है कि पिछले 16-17 सालों में मैंने खुद कुछ तरीकों का इस्तेमाल सफलातपूर्वक किया है। इनमें से कई तरीकों पर तो मैंने कई देशों जैसे जर्मनी, द.अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया में सरकारों को काम करते हुए और बिल्डरों को इन नियमों का पालन करते हुए खुद देखा है।

अगर केंद्र सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करें और इनको लागू करें, तो ना केवल वो जनता के बीच और भी ज्यादा लोकप्रिय हो सकती है बल्कि उसका खजाना भी कई गुना ज्यादा भर सकता है। साथ में देश में प्रॉपर्टी से जुड़े 99.99% फ्रॉड खत्म हो जायेंगे और ब्लैक मनी का कारोबार कम से कम रियल एस्टेट में तो बंद हो ही जाएगा।

सुझाव

  1. सरकार को एक ऐसी वेबसाइट बनानी चाहिए जहां पर देश के हर बिल्डर की पूरी जानकारी हो। इस वेबसाइट पर बिल्डर के पूर्व में पूरे किए जा चुके प्रॉजेक्ट, वर्तमान में चल रहे प्रॉजेक्ट्स और आने वाले अगले 2 साल के प्रॉजेक्ट्स की पूरी जानकारी हो। यानी कि अगर कोई खरीददार देखना चाहे कि फलां बिल्डर का फलां प्रोजेक्ट सरकार और सरकारी एजेंसियों की तरफ से स्वीकृत है या फर्जी है, तो उसको इसकी पूरी जानकारी मिल सके। अगर वेबसाइट पर बिल्डर की डिटेल ना मिले, तो इसका मतलब है कि वो बिल्डर रजिस्टर्ड नहीं है और फर्जी है। ये ठीक उसी तरह हैं जैसे कि mca.gov.in पर देश की सभी private limited और limited कंपनियों की पूरी जानकारी मिल जाती है।
  2. अगर कोई बिल्डर ब्लैकलिस्टिड है तो वो जानकारी भी इसी सरकारी वेबसाइट पर मिल जाए। इससे भोले भाले लोग ब्लैकलिस्टिड बिल्डर के झांसे में आने से बच जायेंगे।
  3. बिल्डर को पहली बुकिंग से लेने से पहले ही जिस जमीन पर बिल्डिंग बननी है उस पर एक बड़ा बोर्ड लगाना चाहिए। इस बोर्ड पर उन सभी छोटी बड़ी जरूरी परमिनशंस की जानकारी हो जो उस बिल्डर को फलां बिल्डिंग बनाने के लिए जरूरी हो। इस बोर्ड का सैंपल इमेज इस आर्टिकल में ही लगा हुआ है। इसे देखकर आपको अंदाजा हो जाएगा कि कैसे सिर्फ एक बोर्ड, करोड़ों फ्लैट खरीदने वालों को बिल्डरों के धोखे से बचा सकता है।
  4. उपभोक्ता को ये अधिकार मिलना चाहिए कि वो अगर एडवांस बुकिंग रकम बिल्डर को देने से पहले बिल्डर से अगर उस प्रॉजेक्ट से जुड़े सभी कागजातों की फोटोकॉपी मांगे तो बिल्डर बिना किसी देरी और आनाकानी के तुरंत दे। अभी कोई भी बिल्डर बिना बुकिंग रकम के ऐसा नहीं करता। बुकिंग एमाउंट लेने के बाद भी वो पूरे कागजात नहीं देते। जब प्रॉपर्टी क्लिन है और सभी जरूरी परमिनशंस ले ली गई हैं, तो फिर बिल्डर को डर किस बात का रहता है? हालांकि इसमें बिल्डर ये तर्क दे सकते हैं कि पेपर्स की फोटोकॉपी से लोग फर्जी पेपर्स बना सकते हैं। ऐसे में मेरा जवाब ये है कि एक फ्लैट खरीदने वाले के पास ना तो इतना वक्त है कि वो किसी बिल्डर की फ्लैट के फर्जी पेपर बनाकर कब्जा करे और ना ही उसके पास इतनी हिम्मत और दिमाग होता है। साथ में फर्जी पेपर के लिए जो नेटवर्क चाहिए वो तो बिल्कुल भी नहीं होता। ऐसे में बिल्डरों को डरने के बजाय लोगों का भरोसा जीतना चाहिए। ग्रेटर नोएडा में एक बिल्डर अपने क्लाइंट्स को ऐसे ही पेपर्स तुरंत दिखा देता है और मांगने पर फोटो कॉपी भी दे देता है।
  5. सूचना बोर्ड का ये सैंपल है
    सूचना बोर्ड का ये सैंपल है
  1. जो जानकारी सैंपल बोर्ड में दर्शाई गई है, यही सब जानकारी बिल्डर को अपनी वेबसाइट पर भी दर्शानी चाहिए। ताकि अगर बोर्ड प्रॉपर्टी पर जाए बिना भी चैक करना चाहे, तो पूरी जानकारी उसे आसानी से तुरंत मिल सके।
  2. बोर्ड पर उस इलाके के सकारी सिविल इंजीनियर या सुपरवाइजर या अधिकारी का नाम और नंबर भी लिखा हो। ताकि अगर उस इलाके में अगर कोई बिल्डिंग गैरकानूनी तरीके से बन रही है, तो कोई भी व्यक्ति तुरंत फोन करके सूचित कर सके। आमतौर पर लोगों को लोकल एरिया के इंजीनियर का नाम औऱ नंबर पता होता नहीं है। साथ ही गूगल पर हर कोई इसे ढूंढने की जहमत उठाया है और ना ही आसानी से ढूंढ पाता है। ऐसे में अगर नंबर और नाम सामने ही लिखा मिल जाए, तो ये काम बहुत ही आसानी से हो जाता है। इंजीनियर के पास जब लोगों के फोन आने लगेंगे, तो वो भी ज्यादा सावधानी से काम करेगा। मैंने इसका कई बार सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है।
  3. हर बिल्डर की वेबसाइट पर उस एजेंसी का नाम और नंबर भी होना चाहिए जो Misleading Advertisements की शिकायतों को देखती है। ताकि अगर उपभोक्ता को कुछ गलत लगे, तो वो समय बर्बाद किए बिना ही तुरंत उस एड के बारे में संबंधित विभाग में एक क्लिक पर शिकायत दर्ज करवा सके। बहुत से बिल्डर Misleading ads अखबारों या होर्डिंग्स के माध्यम से देते हैं। ऐसे ही एक बोर्ड यूपी-दिल्ली बॉर्डर पर (इंदिरापुरम-कौशांबी की तरफ) एक बड़े बिल्डर ने लगा रखा है।
  4. देश में रियल एस्टेट में ब्लैक मनी को घुमाने का काम सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी एजेंट्स ही करते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि इन सभी एजेंट्स को अनिवार्य रूप से रजिस्टर्ड करने का सिस्टम हो। ताकि अगर कोई एजेंट फर्जीवाड़ा करके भाग जाए तो उसको पकडा जा सके। देश में बिल्डर एजेंट्स के जरिए ही फर्जीवाड़ा करते हैं।
  5. हर शहर की डेवलपमेंट ऑथोरिटी के पास बिल्डिंग, सिंगल फ्लोर घर, मॉल, ऑफिस, दुकान इत्यादि बनाने वाले रूल्स की एक बुक हर साल छपती है, जिसे 100-200 रूपए देकर ऑथोरिटी के ऑफिस से खरीदा जा सकता है। 99 प्रतिशत लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं है और जिनको पता है वो इसे खरीदने जहमत भी नहीं उठाते। सरकार को चाहिए कि ऐसा कानून बनाए जिसमें ये रूल्स बुक हर बिल्डर, प्रॉपर्टी एजेंट, स्टेशनरी इत्यादि के पास से आसानी से खरीदी जा सके। इससे लोगों को कानून के हिसाब से घर बनाने और गैरकानूनी इमारतों के निर्माण पर रोक लगाने में काफी मदद मिलेगी।
  6. मथुरा में एक बिल्डर है Kalptaru Buildtech Pvt Ltd । ये बिल्डर हजारों फ्लैट्स ओनर्स को चूना लगाकर अरबों का माल समेटकर गायब हो गया है। इसका कोई अता पता नहीं है। संभवाना है कि ये विजय माल्या की तरह देश से बाहर भाग गया है। इसके कर्मचारियों को भी पिछले 20 महीने से तनख्वाह नहीं मिली है। एक एजेंट ने तो पैसा ना मिलने पर आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्म हत्या कर ली। ऐसी समस्याओं का भी समाधान है। बिल्डरों को प्रॉजेक्ट के हिसाब से मिनिमम गारंटी मनी सरकार के पास जमा कराने का कानून होना चाहिए। ताकि अगर बिल्डर लोगों का पैसा लेकर भागे, तो सरकार गारंटी मनी से पैसा चुका सके। प्रॉजेक्ट पूरा करने के बाद गारंटी मनी, सरकार मिनिमम ब्याज के साथ बिल्डर को वापस कर दे। इससे बिल्डर को भी फायदा और सरकार को भी। बैंकों के साथ भी सरकार ऐसा ही करती है। हालांकि इसे लागू करवा पाना सबसे ज्यादा मुश्किल काम होगा, लेकिन असंभव नहीं।

फायदें

  1. रियल एस्टेट में ब्लैक मनी पर पूरी तरह से रोक।
  2. सरकार को ज्यादा टेक्स आएगा।
  3. ज्यादा टेक्स आएगा तो सरकार को खजाना भरने के लिए जनता पर नए टेक्स लगाने की जरूरत नही पड़ेगी। यानी जनता को राहत मिलेगी।
  4. बेवजह प्रॉप्रटी पर तेजी से बढ़ते दामों पर रोक लग सकेगी।
  5. लोगों को फर्जी प्रॉपर्टी में पैसा लगवाकर भागने वाले बिल्डरों पर रोकथाम हो पाएगी।
  6. कोर्ट में फर्जी केस की बाढ़ से निजात मिलेगी। इससे कोर्ट पर काम का बेवजह का दबाव कम होगा, लाखों लोगों का कोर्ट कचहरी में बर्बाद होने वाला अरबों रूपया बचेगा औऱ साथ में कीमती समय के बचत होगी।
  7. देश के रियल एस्टेट में लोगों का ज्यादा भरोसा बनेगा।

हो सकता है कि लोग कहें अगर इन सुझावों पर अमल किया जाए तो देश में रियल एस्टेट इंडस्ट्री खत्म हो जाएगी दें। लेकिन यहां ये जान लेना जरूरी है कि रियल एस्टेट इंडस्ट्री उन गिने चुने इंडस्ट्रिज में से है जहां कंपनियों को 50 प्रतिशत से भी ज्यादा का नेट प्रॉफिट होता है। तभी तो ये लोग हर फ्लैट की बुकिंग पर एक एजेंट को 1 लाख से लेकर 25 लाख रूपए तक देते हैं। ये लंबी बहस का मुद्दा है। जरूरत पड़ी तो इस पर भी विस्तार से आर्टिकल लिखा जा सकता है। जिसको बिल्डर बनना है और बिल्डिंग बनाकर बेचना का बिजनस करना है, वो तो लाख कानूनों के बाद भी करेगा। बस फर्क इतना रहेगा कि इंडस्ट्री से फ्रॉड लोग गायब हो जायेंगे और टिकाऊ लोग टिके रहेंगे। करोड़ों लोगों को फायदा होगा वो सबसे अहम बात है।

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