जाने ऐसा क्या खास है राजस्थान के IAS अफसर डॉ.नीरज कुमार पवन में

Dr.Niraj Kumar Pawan, IAS Officer

लोगों को शिकायत होती है कि सरकारी अधिकारी खासतौर पर बड़े स्तरों पर बैठे अधिकारी फाइलों को लटकाते रहते हैं। आप अगर अपनी परेशानी लेकर जायेंगे, तो वो बार बार आपको चक्कर लगवा देंगे और आपकी फाइल धूल खाती रहेगी।

लेकिन अगर एक बार आप युवा IAS अधिकारी और राजस्थान के कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी के स्पेशल सेक्रेटरी डॉ.नीरज कुमार पवन से मिल लिए, तो आपका ये भ्रम दूर हो जाएगा। आप ये सोचने पर मजबूर हो जायेंगे कि क्या वाकई में ये सरकारी अधिकारी हैं, कैसे करते हैं ये इतनी तेजी से काम, कहां से आती है इतनी फुर्ती बगैरह बगैरह।

मेरा भी ये भ्रम दूर हुआ, जब मैं उनके केबिन में करीब 5 घंटे बैठा। इन 5 घंटों में मैंने जो कुछ देखा, सुना और महसूस किया, उसने मजबूर कर दिया कि मैं उन पर अपने ब्लॉग में एक आर्टिकल लिखू क्योंकि बुराई के बारे में तो दुनिया लिखती है लेकिन अच्छे काम को देखने के बाद भी अगर नहीं लिखा गया, तो पत्रकार होने के नाते अपने 16 साल लंबे जर्नलिज्म करियर के साथ ये अन्याय होगा।

Dr.Niraj Kumar Pawan, IAS Officer
Dr.Niraj Kumar Pawan, IAS Officer

दरअसल, सोमवार 4 अप्रैल 2016 की सुबह 11 बजे का मुझे डॉ.नीरज कुमार पवन जी से उनके जयपुर स्थित पंत कृषि भवन में मिलने का समय मिला। मैं एक प्रोजेक्ट के बारे में बात करने गया था। यहां ये बता देना जरूरी है कि डॉ.नीरज को ये पता ही नहीं था कि मैंने एंटरप्रन्योर होने के अलावा पेशे से पत्रकार हूं। इसलिए मेरे सामने दिखावे का काम करने (जो कि सामान्य तौर पर अक्सर सरकारी अधिकारी मीडिया वालों के सामने करते हैं।) का कोई कारण ही नहीं था।

सुबह 11 बजे से लेकर मैं 4 बजे तक उनके केबिन के एक कौने में बैठा रहा और जो कुछ देखा वो यहां लिख रहा हूं। आपको भी जानना जरूरी है कि देश की 21वीं सदी के युवा सरकारी अधिकारी कैसे जनता की समस्याओं का हल निकाल रहे हैं।

काम करने का स्टाइल

  1. बड़ी समस्याओं का तुरंत निपटाना
  2. काम को लटकाने के बजाय तुरंत खुद ही कॉल करना और साफ साफ बात करके मामला खत्म कर देना।
  3. बिना दे किए तुरंत संबंधित अधिकारी को बुलाना और मीटिंग करके फाइल निपटा देना।
  4. मिलने आने वाले हर शख्स का स्वागत करने का जोशिला अंदाज
  5. मीटिंग के दौरान आने वाले हर कॉल को उठाना और सही ढंग से बात करना। ऐसा बहुत कम अधिकारियों के साथ ही देखने को मिलता है।

 

Dr.Niraj Kumar Pawan, IAS Officer
Dr.Niraj Kumar Pawan, IAS Officer

उदाहरण 1 जिस बात ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया वो थी किसानों के फायदे के बारे में डॉ. नीरज की सकारात्म सोच। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़े एक मसले पर उन्होंने सबसे ज्यादा वक्त दिया और बार बार इस बात पर जोर दिया इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ अगर किसी को मिलना चाहिए तो वो किसान होना चाहिए। उन्होंने अपने अधिकारियों को ये साफ निर्देश दे दिए कि राजस्थान के हर जिले में कोई भी किसान कोई भी फसल करे, उसको प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ मिलना चाहिए, जबकि ये व्यवस्था पहले नहीं थी। पहले सिर्फ उसी फसल पर किसानों को बीमा योजना का लाभ मिल सकता था जिसे उस खास जिले में सरकार ने तय किया है। यानी अगर अजमेर में बाजरा को अनुमति मिली है लेकिन अगर किसान ने बाजरा के बजाय सरसों की है और अगर उसकी फसल खराब हो गई, तो उसको बीमा योजना का लाभ नहीं मिलने वाला था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। शाम के 4 बज चुके थे यहां सरकारी अधिकारियों के घर वापसी की तैयारी शुरु करने का वक्त लेकिन डॉ. नीरज ने तुंरत ही आदेश दे दिया कि सभी लोग मीटिंग के लिए आधे घंटे में आ जाए, ताकि इस मामले पर सबकुछ आज ही क्लियर हो जाए।

 

उदाहरण 2 राजस्थान में सरकारी विभाग है जिसका शॉर्ट में नाम है आत्मा इनके कुछ 744 कर्मचारियों का स्थाई होने का बड़ा मामला लटका हुआ था। जिसको उन्होंने पूरा समाधान तुरंत निकलवा दिया। अस्थाई कर्मचारियों के सामने ही तुरंत संस्था के निदेशक को फोन करके बुलाया। पूरा मामला समझा और तुरंत ही बता दिया कि आगे क्या करना है। निदेशक को भी दिशा निर्देश मिल गए कि अगले 1 हफ्ते में कैसे इस समस्या का स्थाई समाधान कर देना है और बेचारे अस्थाई कर्मचारियों को भी पता चल गया कि कैसे अब उनको स्थाई किया जाना है। यानी महीनों तक चक्कर लगाने के बजाय सिर्फ 1-2 घंटे में ही पूरा मामला निपटा दिया।

 

उदाहरण 3 किसानों को बीज का वितरण – किसानों को कब कहां कैसे और कितना बीज का वितरण करना है इस मुद्दे पर भी उन्होंने फुर्तीले अंदाज में समाधान निकाल दिया।

 

उदाहरण 4 भरतपुर जिले से कुछ गांव वाले आए। मीटिंग का समय लिए बिना आए थे ये लोग। लेकिन फिर भी उनको मिलने में कोई दिक्कत नहीं हुई। डॉ. नीरज पहले भरतपुर जिले के कलेक्टर रह चुके हैं। उस दौर में भरतपुर में गैरकानूनी काम धंधा करने वालों में डॉ.नीरज का कितना खौफ था, इसका गांव वालों ने एक एक कर जिक्र करना शुरु किया। लेकिन उनको चले जाने के बाद अब वो खौफ नहीं है, जिसका फायदा उठाकर वहां दोबारा से गैर कानूनी धंधा करने वाले दोबारा सर उठा रहे हैं। ऐसे में गांव वालों ने डॉ. नीरज से अनुरोध किया कि आप वापस भरतपुर आ जाओ ताकि वो खौफ दोबारा बन जाए और शहर में गैर कानूनी धंधा करने वाले दोबारा से खत्म हो जाए।

यहां मैंने सिर्फ 4 ही ऐसे उदाहरण लिखे हैं जो उनको काम करने के स्टाइल को बताते हैं। लेकिन 5 घंटे वहां बैठने के दौरान मेरे सामने उन्होने करीब ऐसे 18-20 मामले निपटा दिए। अगर इस रफ्तार को आधार बनाया जाए तो पूरे साल में 365 दिन में वो कितनी ऐसी फाइलों को निपटा सकते हैं आप खुद ही अंदाजा लगाइए। मेरे सामने जितने भी मुद्दे आए उनको पर्मानेंट निपटाने का अंतिम दिन 15 अप्रैल से आगे का नहीं दिया गया। यानी 10-11 दिन में ही पूरा समाधान। कमाल की रफ्तार है जी।

हो सकता है कि कुछ लोग (जो हमेशा हर अच्छे काम में बुराई ढूंढते रहते हैं।) ये कहे कि नया खून है, नया जोश है इसलिए काम करने का ऐसा जूनु है। लेकिन यहां बता देना जरूरी है कि दुर्गापुर, करौली, पाली, भरतपुर जिले के क्लेक्टर रह चुके डॉ. नीरज 2003 से सरकारी पदों पर रहते हुए जनता की सेवा में लगे हुए हैं यानी पिछले 13 साल से। लोगों की नौकरी आमतौ पर 30-35 की मानी जाती है यानी वो अपने कुल करियर का 40-45 प्रतिशत हिस्सा दे चुके हैं लेकिन जोश है कि देखते ही बनता है। चयवनप्राश वालों को तो ऐसे ही जोशिले अधिकारियों को अपने एड में दिखाना चाहिए।

अंत में एक ही बात कहूंगा, कि किसी भी देश की कोई भी सरकार कितनी भी अच्छी योजना क्यों ना बना ले, लेकिन ये तब तक सफलता के साथ लागू नहीं हो सकती, जब तक कि डॉ.नीरज जैसे फुर्तीले अधिकारी उनकी टीम में ना हो। ये बॉर्डर पर युद्ध लड़ रही सेना की एक बड़ी टुकड़ी के लीडर की तरह हैं।

भारत माता की जय

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